पंजाब

बड़ी खबर ! धान के पौधे दोबारा रोपने के लिए मान सरकार विभिन्न जिलों में नर्सरी तैयार करेगी

धान की विभिन्न किस्मों में बाढ़ की सहनशीलता के बावजूद, उफनती नदियों ने इस फसल को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। ऐसे में किसानों के पास धान की पौध दोबारा रोपने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

कृषि विभाग के निदेशक डॉ. गुरविंदर सिंह ने कहा, “हमने बाढ़ प्रभावित जिलों-मोहाली, पटियाला, जालंधर, मोगा और तरनतारन में नर्सरी तैयार की हैं।”

कपूरथला के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन करनैल सिंह ने कहा कि किसानों के लिए 20 नर्सरियों में बासमती के पौधे लगाए गए हैं। अगले 20 से 25 दिन में पौधे तैयार हो जाएंगे।

फसल क्षति का आकलन करने की प्रक्रिया राजस्व विभाग द्वारा की जा रही थी। बाढ़ ने धान के साथ-साथ मक्के की फसल, सब्जियां और हरा चारा भी बर्बाद कर दिया है।

संगरूर के मुख्य कृषि अधिकारी हरबंस सिंह ने कहा, “जिले में बाढ़ से लगभग 20,000 एकड़ खड़ी फसल प्रभावित हुई है।”

सतलुज में जल स्तर बढ़ने से मोगा जिले में लगभग 12,000 एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। धर्मकोट के संघेड़ा समेत कुछ गांव पानी से घिर गए हैं।

प्रारंभिक रिपोर्टों में तरनतारन में नदियों के संगम के किनारे लगभग 32,000 हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल को नुकसान होने का सुझाव दिया गया है।

अमृतसर में कृषि विभाग ने फसलों के नुकसान की कोई सूचना नहीं दी है। रोपड़, आनंदपुर साहिब, मोरिंडा और चमकौर साहिब में भी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

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