सीएम योगी का विजन: गोबर से ऊर्जा, खाद और खेती को नई ताकत

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत गोबर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। गोबर से बायोगैस और जैविक खाद तैयार कर ऊर्जा की जरूरतों के साथ कृषि क्षेत्र को भी लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
गोबर से तैयार बायोगैस ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत के रूप में काम आ सकती है। वहीं, इसके अवशेष से तैयार जैविक खाद खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है।
इस मॉडल में पशुपालन, ऊर्जा उत्पादन और खेती को एक-दूसरे से जोड़ने की परिकल्पना की गई है। पशुओं से मिलने वाला गोबर जहां पहले बेकार समझा जाता था, वहीं अब उसका इस्तेमाल ऊर्जा और कृषि संसाधन के रूप में किया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। किसान और पशुपालक गोबर का बेहतर प्रबंधन कर अतिरिक्त आर्थिक लाभ हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
गोबर आधारित अर्थव्यवस्था का यह मॉडल पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जैविक खाद और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने से गांवों में टिकाऊ विकास की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
सरकार का जोर कृषि, पशुपालन और ऊर्जा को एक साथ जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने पर है। गोबर के उपयोग से तैयार होने वाला यह नया चक्र किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक अवसर पैदा कर सकता है।



