जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनेगी समिति, प्रोजेक्ट अलंकार के पैसे का होगा बेहतर उपयोग

उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अब इस योजना के तहत मिलने वाली धनराशि जरूरत के अनुसार दी जाएगी, जिससे स्कूलों के बुनियादी ढांचे को अधिक प्रभावी तरीके से सुधारा जा सके। इसके लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जो यह तय करेगी कि किस स्कूल को कितनी और किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है। पहले जहां एक तय मानक के अनुसार धनराशि वितरित की जाती थी, वहीं अब स्थानीय आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के विद्यालयों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से संसाधनों का दुरुपयोग कम होगा और वास्तविक जरूरत वाले विद्यालयों तक मदद पहुंच सकेगी। समिति में शिक्षा विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य संबंधित सदस्य शामिल होंगे, जो स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर फंड का आवंटन किया जाएगा। इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही तय होगी।
‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के तहत स्कूलों में कक्षाओं की मरम्मत, शौचालय, पेयजल, बिजली, फर्नीचर और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं को विकसित किया जाता है। नई नीति लागू होने के बाद उन स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां छात्र संख्या अधिक है लेकिन सुविधाएं सीमित हैं। साथ ही, जिन विद्यालयों में पहले से काम अधूरा है, उन्हें भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।
इस पहल से शिक्षा के स्तर में सुधार होने के साथ-साथ छात्रों को बेहतर वातावरण मिलेगा, जिससे उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी। सरकार का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।



