उत्तराखंड में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं के लिए AI वॉइस पोर्टल लॉन्च

उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ विविध लोकसंस्कृति और भाषाई परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी यहां की प्रमुख लोकभाषाओं में शामिल हैं। इन भाषाओं में लोकगीत, लोककथाएं, पारंपरिक ज्ञान और क्षेत्रीय जीवनशैली की झलक मिलती है। बदलते समय में इन भाषाओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़ना इनके संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री की ओर से शुरू किए गए वॉइस कलेक्शन पोर्टल का उद्देश्य इन लोकभाषाओं के बोलने के नमूनों को एकत्र करने के लिए डिजिटल मंच उपलब्ध कराना है। AI तकनीक के विकास में भाषा और आवाज से जुड़े डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे प्रयास भविष्य में स्थानीय भाषाओं के लिए डिजिटल सेवाएं और तकनीकी संसाधन विकसित करने में उपयोगी हो सकते हैं।
इस पहल से गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी बोलने वाले लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय लोगों की आवाज और भाषा के वास्तविक स्वरूप को दर्ज करने से उत्तराखंड की भाषाई विविधता को डिजिटल दुनिया में बेहतर स्थान मिल सकता है।



