पहाड़ी ककड़ी की बड़ी का साग और रायता है बेहद स्वादिष्ट, जानें कीमत

उत्तराखंड की पहाड़ी ककड़ी अपने खास स्वाद और स्थानीय खानपान में उपयोग के लिए जानी जाती है। पहाड़ों में मौसम के अनुसार मिलने वाली इस ककड़ी से कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। गर्मियों और अन्य मौसमों में इसे सलाद के रूप में खाने के साथ रायता तैयार करने में भी इस्तेमाल किया जाता है। दही के साथ बनाई गई ककड़ी की रायता रसोई में ताजगी भरा विकल्प माना जाता है।
बड़ी के साथ पहाड़ी ककड़ी का साग
पहाड़ी ककड़ी से बनने वाला बड़ी का साग उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन की खास पहचान है। इसे बनाने में ककड़ी के साथ दाल से तैयार की गई सूखी बड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। मसालों और स्थानीय पकाने की विधि के कारण इस व्यंजन का स्वाद अलग होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाले ऐसे व्यंजन स्थानीय संस्कृति और खानपान की विरासत को आगे बढ़ाते हैं।
ककड़ी का रायता भी लोगों को आता है पसंद
पहाड़ी ककड़ी का रायता भोजन के साथ परोसा जाने वाला लोकप्रिय विकल्प है। इसे तैयार करने के लिए ककड़ी को बारीक काटकर या कद्दूकस करके दही में मिलाया जाता है। स्वाद के अनुसार नमक, भुना जीरा और अन्य मसाले मिलाए जा सकते हैं। यह रायता दाल, रोटी, चावल और पहाड़ी व्यंजनों के साथ खाया जा सकता है। इसकी खासियत स्थानीय सामग्री से तैयार होने वाला सरल और ताजगी भरा स्वाद है।
50 रुपये किलो बताई गई कीमत
अल्मोड़ा में पहाड़ी ककड़ी की कीमत 50 रुपये प्रति किलो बताई गई है। हालांकि, बाजार में इसका भाव मौसम, उपलब्धता, गुणवत्ता और स्थानीय मांग के अनुसार बदल सकता है। खरीदारी से पहले स्थानीय दुकानदार या बाजार से ताजा कीमत की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।
पहाड़ी खानपान और स्थानीय उत्पादों की खास पहचान
उत्तराखंड का पारंपरिक खानपान यहां की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय फसलों और पीढ़ियों से चली आ रही पाक परंपराओं से जुड़ा है। पहाड़ी ककड़ी जैसी स्थानीय उपज से बनने वाले व्यंजन क्षेत्रीय भोजन को विशिष्ट पहचान देते हैं। बड़ी का साग और ककड़ी का रायता न केवल स्वाद के लिए पसंद किए जाते हैं, बल्कि स्थानीय खाद्य परंपराओं को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं।



