उत्तराखंड में बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष, 14 सालों में गुलदार और बाघों ने मारे 63 हजार मवेशी

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। पहाड़ी और वन क्षेत्रों से लगे इलाकों में गुलदार और बाघों की गतिविधियां बढ़ने से ग्रामीणों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले 14 वर्षों में गुलदार और बाघों ने करीब 63 हजार मवेशियों को अपना शिकार बनाया है।
वन्यजीवों के हमलों का सबसे अधिक असर उन ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ता है, जहां लोग पशुपालन पर निर्भर हैं। मवेशियों के मारे जाने से किसानों और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इसके साथ ही जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में भोजन और आवास से जुड़ी चुनौतियां, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और वन क्षेत्रों के आसपास बढ़ती गतिविधियां मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
वन विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर और ग्रामीणों को जागरूक करने जैसे कदम उठाए जाते हैं। कई जगहों पर मुआवजा व्यवस्था के जरिए प्रभावित परिवारों को राहत देने का प्रयास भी किया जाता है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। इसके लिए दीर्घकालिक योजनाओं, बेहतर निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।



