उत्तराखंड में देश की सबसे लंबी रेल सुरंग तैयार, जनवरी से बिछेगा ट्रैक

उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब निर्माण के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। परियोजना के तहत देश की सबसे लंबी रेल सुरंग टनल-8 में लाइनिंग और फिनिशिंग का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद सुरंग के भीतर रेलवे ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया जाएगा।
देवप्रयाग क्षेत्र में सौड़ से जनासु के बीच बनी इस सुरंग की लंबाई करीब 14.57 किलोमीटर है। अप्रैल 2025 में सुरंग का ब्रेकथ्रू पूरा हुआ था, जिसके बाद निर्माण कार्य को तेजी मिली। यह सुरंग ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉडगेज रेल परियोजना का अहम हिस्सा है।
सुरंग के निर्माण के बाद अब अंदरूनी हिस्से को रेल संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। लाइनिंग, फिनिशिंग और अन्य जरूरी कार्य पूरे होने के बाद ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया शुरू होगी। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से ट्रैक निर्माण का काम शुरू करने की तैयारी है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना करीब 125 किलोमीटर लंबी है और इसका बड़ा हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। परियोजना में कई बड़ी सुरंगों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है। करीब 105 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों के भीतर होने की वजह से यह देश की प्रमुख पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है।
इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। वर्तमान में सड़क मार्ग से लगने वाले लंबे समय की तुलना में रेल यात्रा करीब ढाई घंटे में पूरी होने का लक्ष्य है। इससे गढ़वाल के दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
रेल परियोजना से उत्तराखंड के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। चारधाम क्षेत्र की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी विकसित होने से पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
देश की सबसे लंबी रेल सुरंग में ट्रैक बिछने के बाद परियोजना की तस्वीर और बदल जाएगी। अब सभी की नजर सुरंग के अंतिम निर्माण कार्य, ट्रैक बिछाने और आगे होने वाले रेलवे सिस्टम के काम पर है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाली परियोजना मानी जा रही है।



