
दुनिया भर में El Niño की संभावित वापसी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह प्रभाव ज्यादा मजबूत हुआ, तो यह 1876 जैसी विनाशकारी स्थिति पैदा कर सकता है, जब भयंकर सूखे और अकाल ने कई देशों को अपनी चपेट में ले लिया था। उस दौर को Great Famine of 1876–1878 के नाम से जाना जाता है, जिसमें अनुमानित रूप से दुनिया की करीब 4% आबादी प्रभावित हुई थी।
अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव होता है, जिससे वैश्विक मौसम पैटर्न बिगड़ जाते हैं। भारत समेत कई देशों में इससे बारिश कम हो सकती है, जिससे खेती और जल संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते तैयारी नहीं की गई, तो इसके गंभीर आर्थिक और सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील हो सकती है। कम बारिश, सूखा और फसल उत्पादन में गिरावट से किसानों पर भारी असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित संकट से निपटने के लिए रणनीतियां तैयार की जा रही हैं।



