
नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयदशमी उत्सव कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश के नागरिकों से आह्वान किया कि भारत को मजबूत बनाना सिर्फ सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्वों को निष्ठा से निभाता है, तभी राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है। मोहन भागवत ने यह भी कहा कि आज भारत विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस प्रगति को बनाए रखने के लिए सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण आवश्यक है।
संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा को भी अपनाएं। उन्होंने कहा कि देश की ताकत सिर्फ उसकी सेना या अर्थव्यवस्था में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र और सामूहिक जिम्मेदारी में निहित होती है। मोहन भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर हर नागरिक अपने आसपास के समाज के लिए थोड़ा भी योगदान देता है, तो यह छोटे-छोटे प्रयास मिलकर राष्ट्र निर्माण में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इस विविधता को सम्मान और समझ के साथ बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि जाति, धर्म या भाषा के भेदभाव को छोड़कर एकता की भावना से कार्य करें। मोहन भागवत ने कहा कि “राष्ट्र की सेवा करना सिर्फ भाषण देने से नहीं होता, बल्कि कर्म से सिद्ध होता है।”
अंत में उन्होंने समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि “भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक अपने हिस्से की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए।” नागपुर में हुआ यह संबोधन न केवल संघ कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक था, बल्कि पूरे देश के नागरिकों के लिए भी एक गहन संदेश छोड़ गया कि राष्ट्र निर्माण कोई एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि निरंतर प्रयासों से बनने वाली प्रक्रिया है।



