भेदभाव खत्म करने की दिशा में कदम: योगी सरकार ने बदले निकाय कानून

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सामाजिक समानता और मानवीय गरिमा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। हाल ही में हुई योगी कैबिनेट की बैठक में नगर निकाय अधिनियमों से ‘कुष्ठाश्रम’ जैसे पुराने और भेदभावपूर्ण शब्द को हटाने का फैसला किया गया। यह कदम न केवल कानूनों को समयानुकूल बनाने की दिशा में है, बल्कि समाज में कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक और भेदभाव को समाप्त करने की एक ठोस पहल भी माना जा रहा है।
दरअसल, लंबे समय से विभिन्न नगर निकाय कानूनों और नियमों में ‘कुष्ठाश्रम’ शब्द का प्रयोग होता आ रहा था, जो कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों को अलग-थलग करने और उन्हें हीन दृष्टि से देखने की मानसिकता को दर्शाता था। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार कुष्ठ रोग पूरी तरह से उपचार योग्य है और इसके बावजूद इस शब्द का कानूनी दस्तावेजों में बने रहना सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देता था। योगी कैबिनेट ने इस वास्तविकता को समझते हुए ऐसे सभी प्रावधानों को हटाने का निर्णय लिया है, जो किसी भी रूप में अमानवीय या अपमानजनक माने जाते हैं।
सरकार का मानना है कि भाषा केवल शब्दों का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह सोच और व्यवहार को भी प्रभावित करती है। जब कानूनों में ही भेदभावपूर्ण शब्दावली होगी, तो समाज में समानता और सम्मान की भावना विकसित होना मुश्किल हो जाता है। इसलिए निकाय अधिनियमों में संशोधन कर ऐसे शब्दों को हटाना जरूरी था, जो किसी वर्ग विशेष को कलंकित करते हों। इस फैसले से यह संदेश भी जाता है कि राज्य सरकार हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह निर्णय सामाजिक न्याय के साथ-साथ संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप भी है। भारतीय संविधान समानता, गरिमा और भेदभाव से मुक्ति की गारंटी देता है। योगी सरकार का यह कदम संविधान की भावना को धरातल पर उतारने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, यह बदलाव स्थानीय निकायों के कामकाज में भी संवेदनशीलता लाएगा और प्रशासनिक भाषा को अधिक मानवीय बनाएगा।
कुल मिलाकर, ‘कुष्ठाश्रम’ शब्द को हटाने का फैसला केवल एक कानूनी संशोधन नहीं, बल्कि समाज में सोच बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह निर्णय कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों को सम्मान के साथ मुख्यधारा में जोड़ने और भेदभाव रहित उत्तर प्रदेश के निर्माण की दिशा में योगी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



