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APS अमर सिंह की वापसी पर सियासी हलचल, CM योगी से मुलाकात के बाद क्यों बदला फैसला?

उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में APS अमर सिंह की बहाली को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ समय पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर कथित तौर पर जातिवादी टिप्पणी करने के आरोपों में घिरे अमर सिंह को निलंबित कर दिया गया था। उस समय यह कार्रवाई सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उदाहरण मानी गई थी। लेकिन अब उनकी बहाली ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा?

सूत्रों के मुताबिक, अमर सिंह की बहाली के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी सफाई और विभागीय जांच में सामने आए तथ्य हैं। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जिस बयान को जातिवादी टिप्पणी के रूप में प्रचारित किया गया था, उसका संदर्भ और आशय अलग था। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बयान को तोड़-मरोड़ कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिससे प्रशासन और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर उन्हें आंशिक रूप से राहत दी गई।

इसके अलावा, अमर सिंह की प्रशासनिक छवि और लंबे समय का सेवा रिकॉर्ड भी बहाली की एक अहम वजह बना। वे एक सीनियर अधिकारी माने जाते हैं और कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। विभागीय स्तर पर यह तर्क दिया गया कि यदि कोई अधिकारी जानबूझकर अनुशासनहीनता नहीं करता और जांच में दोषी साबित नहीं होता, तो उसे दूसरा मौका दिया जाना चाहिए।

मामले में एक और अहम मोड़ तब आया जब APS अमर सिंह ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस मुलाकात को औपचारिक शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन इसके राजनीतिक और प्रशासनिक मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि अमर सिंह ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट की, साथ ही भरोसा दिलाया कि भविष्य में किसी भी तरह का विवादित बयान या आचरण नहीं होगा। मुख्यमंत्री स्तर पर मामले की समीक्षा के बाद ही बहाली को हरी झंडी मिली।

हालांकि, विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी पर जातिवाद जैसे गंभीर आरोप लगे हों, तो उसकी बहाली गलत संदेश देती है। वहीं, सरकार और समर्थकों का तर्क है कि बिना ठोस प्रमाण के किसी को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है और जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद बहाली स्वाभाविक प्रक्रिया है।

कुल मिलाकर, APS अमर सिंह की बहाली सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार सार्वजनिक दबाव के साथ-साथ तथ्यों और जांच रिपोर्ट को भी महत्व देती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला प्रशासनिक अनुशासन और राजनीतिक संदेश के लिहाज से क्या असर डालता है।

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