
वेनेजुएला को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट और संतुलित रखा है। अमेरिकी कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ उठाए गए कदमों पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंतित है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के माध्यम से समस्याओं के समाधान का पक्षधर रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप से हालात और जटिल हो सकते हैं, इसलिए संयम और बातचीत ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है। भारत के लिए वेनेजुएला केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय समुदाय की सुरक्षा और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में स्थिरता से भी जुड़ा विषय है। वेनेजुएला लंबे समय से भारत का महत्वपूर्ण कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है और वहां भारतीय मूल के लोग भी रहते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है। जयशंकर ने कहा कि भारत किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देना चाहता है, ताकि आम नागरिकों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत अमेरिका समेत सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए है और किसी भी एकतरफा कार्रवाई के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करना जरूरी है। भारत का मानना है कि प्रतिबंधों और दबाव की राजनीति से अक्सर मानवीय संकट गहराता है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। इसी वजह से भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भी हमेशा शांतिपूर्ण समाधान, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के सम्मान और संप्रभुता के सिद्धांत को समर्थन दिया है। विदेश मंत्री के बयान से साफ है कि भारत वैश्विक राजनीति में संतुलन साधते हुए अपने राष्ट्रीय हितों और मूल्यों दोनों को साथ लेकर चलना चाहता है। वेनेजुएला संकट पर भारत की चिंता दरअसल क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा सुरक्षा और मानवीय पहलुओं से जुड़ी है, न कि किसी भू-राजनीतिक धड़ेबंदी से। जयशंकर का स्पष्ट संदेश यही है कि टकराव नहीं, संवाद ही स्थायी समाधान का रास्ता है।
