लाइफस्टाइलस्वास्थ्य

रिलेशनशिप ठीक, मगर मैरिज से दूरी—जानिए पुरुषों के कमिटमेंट फोबिया पर एक्सपर्ट की राय

आधुनिक दौर में रिश्तों की परिभाषा तेजी से बदल रही है। कई पुरुष प्यार में होते हैं, अपने पार्टनर के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, भविष्य की बातें भी करते हैं, लेकिन जैसे ही शादी या लंबे समय की कानूनी-सामाजिक जिम्मेदारी की बात आती है, वे पीछे हटने लगते हैं। यह स्थिति अक्सर महिलाओं के लिए उलझन और असुरक्षा पैदा करती है। आखिर ऐसा क्यों होता है कि प्यार होने के बावजूद कुछ पुरुष कमिटमेंट से डरते हैं? इस विषय पर मनोवैज्ञानिकों और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय सामने आती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इसकी एक बड़ी वजह जिम्मेदारियों का दबाव है। शादी को अब भी आर्थिक स्थिरता, परिवार की देखभाल, करियर संतुलन और सामाजिक अपेक्षाओं से जोड़कर देखा जाता है। कई पुरुषों को लगता है कि वे अभी इन सबके लिए तैयार नहीं हैं। इसके अलावा व्यक्तिगत स्वतंत्रता खोने का डर भी अहम कारण माना जाता है। उन्हें आशंका रहती है कि शादी के बाद फैसलों में आजादी कम हो जाएगी या लाइफस्टाइल बदलनी पड़ेगी।

कुछ मामलों में पिछली असफल रिलेशनशिप, घर में देखे गए झगड़े या तलाक के अनुभव भी मन में असुरक्षा पैदा कर देते हैं। ऐसे पुरुष भावनात्मक रूप से जुड़ाव तो चाहते हैं, लेकिन स्थायी बंधन से बचते हैं ताकि भविष्य में संभावित दर्द से खुद को बचा सकें। वहीं, करियर को प्राथमिकता देना, सही समय का इंतजार करना या ‘परफेक्ट’ परिस्थिति की चाह भी देरी की वजह बनती है।

एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि हर पुरुष कमिटमेंट से नहीं भागता, बल्कि कई बार संवाद की कमी समस्या को बढ़ा देती है। पार्टनर की अपेक्षाओं, डर और योजनाओं पर खुलकर बात न होने से गलतफहमियां पैदा होती हैं। रिश्ते में पारदर्शिता, धैर्य और एक-दूसरे की भावनाओं को समझना बेहद जरूरी है।

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