डायबिटीज में स्वाइन फ्लू कितना खतरनाक? ब्लड शुगर पर असर

स्वाइन फ्लू, जिसे H1N1 इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है, एक संक्रामक श्वसन रोग है। इसके कारण बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए यह संक्रमण सामान्य फ्लू की तुलना में अधिक जोखिम भरा हो सकता है। टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में, ब्लड शुगर नियंत्रित रहने के बावजूद, फ्लू से गंभीर जटिलताएं होने का खतरा बढ़ सकता है।
डायबिटीज के मरीजों में स्वाइन फ्लू क्यों हो सकता है गंभीर?
डायबिटीज शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। यदि ब्लड शुगर लंबे समय तक अधिक रहती है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में शरीर के लिए संक्रमण से निपटना मुश्किल हो सकता है और ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। स्वाइन फ्लू के गंभीर मामलों में निमोनिया, सांस लेने में परेशानी और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।
स्वाइन फ्लू होने पर ब्लड शुगर क्यों बढ़ सकती है?
जब शरीर किसी वायरस से लड़ता है, तो तनाव से जुड़े हार्मोन रिलीज होते हैं। ये हार्मोन ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा सकते हैं। इस कारण डायबिटीज के मरीजों में संक्रमण के दौरान शुगर सामान्य से अधिक हो सकती है, भले ही वे अपनी नियमित दवाएं ले रहे हों। बुखार, शरीर में पानी की कमी और शारीरिक गतिविधि कम होना भी शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकते हैं।
क्या ब्लड शुगर कम भी हो सकती है?
हां, संक्रमण के दौरान ब्लड शुगर हमेशा बढ़े, ऐसा जरूरी नहीं है। यदि मरीज को भूख नहीं लग रही, उल्टी हो रही है या वह सामान्य से कम खाना खा रहा है, तो शुगर का स्तर गिर सकता है। इंसुलिन या कुछ अन्य डायबिटीज दवाएं लेने वाले लोगों में यह जोखिम विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है। इसलिए बीमारी के दौरान ब्लड शुगर की नियमित निगरानी करना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू होने पर डायबिटीज के मरीज क्या करें?
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डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें: डायबिटीज के मरीजों में फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटीवायरल उपचार शुरू कर सकते हैं।
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ब्लड शुगर नियमित जांचें: बीमारी के दौरान डॉक्टर की सलाह के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बार शुगर जांचें और रीडिंग का रिकॉर्ड रखें।
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पर्याप्त तरल पदार्थ लें: पानी की कमी से बचने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लें, बशर्ते डॉक्टर ने किसी बीमारी के कारण तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह न दी हो।
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दवाएं खुद से बंद न करें: इंसुलिन या अन्य दवाओं की खुराक में बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। बीमारी के दौरान उपचार में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
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आराम करें और भोजन का ध्यान रखें: जहां तक संभव हो, नियमित अंतराल पर उपयुक्त भोजन लेते रहें और डॉक्टर द्वारा बताई गई बीमारी के दौरान की देखभाल संबंधी योजना का पालन करें।
किन लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
यदि मरीज को सांस लेने में परेशानी, सीने में लगातार दर्द या दबाव, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी या तरल पदार्थ पीने में असमर्थता हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। बहुत कम ब्लड शुगर या बहुत अधिक शुगर के साथ गंभीर लक्षण भी आपात स्थिति हो सकते हैं।
ध्यान दें: डायबिटीज के मरीजों के लिए डॉक्टर की सलाह से सालाना इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगवाना फ्लू और उसकी गंभीर जटिलताओं से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय है। स्वाइन फ्लू के लक्षण होने पर जांच और उपचार में देरी न करें।



