
Pakistan ने आर्थिक संकट के बीच International Monetary Fund के साथ करीब 11,383 करोड़ रुपये के समझौते पर सहमति जताई है। बताया जा रहा है कि यह फंड जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए दिया जाएगा, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और ऐसे में नए फंड का सही उपयोग बेहद जरूरी है। कुछ आलोचकों का आरोप है कि जलवायु परिवर्तन के नाम पर मिलने वाले इस फंड का दुरुपयोग हो सकता है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस तरह के फंड को सख्त शर्तों और निगरानी के तहत जारी करती हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान इस राशि का उपयोग किस तरह करता है और क्या यह वास्तव में पर्यावरण सुधार के लिए काम आता है या नहीं।



