लंबी अवधि के निवेश में Indian Stock Market को हमेशा से “लॉन्ग रेस का घोड़ा” माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो शेयर बाजार ने डेट इंस्ट्रूमेंट्स, सोना और रियल एस्टेट जैसे पारंपरिक निवेश विकल्पों की तुलना में अधिक औसत वार्षिक रिटर्न दिया है।
समय के साथ कंपनियों की ग्रोथ, अर्थव्यवस्था का विस्तार और कॉर्पोरेट प्रॉफिट बढ़ने से इक्विटी में निवेश करने वालों की संपत्ति में तेज़ वृद्धि देखी गई है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहता है, लेकिन लंबे समय तक निवेश रखने पर जोखिम संतुलित हो जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सही स्टॉक्स का चयन और धैर्य के साथ किया गया निवेश लॉन्ग टर्म में मजबूत वेल्थ क्रिएशन का जरिया बन सकता है। इसी वजह से शेयर बाजार को अन्य निवेश विकल्पों से आगे माना जाता है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है और इसमें शॉर्ट टर्म में नुकसान का जोखिम भी रहता है। इसलिए निवेशकों को बिना रिसर्च और बिना रणनीति के पैसा नहीं लगाना चाहिए। सही सेक्टर और मजबूत कंपनियों का चयन इस खेल में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वहीं दूसरी ओर, गोल्ड और रियल एस्टेट जैसे एसेट्स स्थिर रिटर्न और सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन उनकी ग्रोथ इक्विटी के मुकाबले अक्सर धीमी रहती है। इसी कारण पोर्टफोलियो में बैलेंस बनाकर निवेश करना सबसे समझदारी भरा विकल्प माना जाता है।



