परिक्रमा का महत्व: किस देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के साथ परिक्रमा का भी विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि अलग-अलग देवताओं की परिक्रमा करने की संख्या भी अलग होती है और सही नियमों के अनुसार की गई परिक्रमा से ही पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यह परंपरा आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती है।
आम तौर पर भगवान शिव की आधी परिक्रमा करने की परंपरा है, जबकि भगवान विष्णु और उनके अवतारों की तीन या उससे अधिक परिक्रमा की जाती है। गणेश जी की भी तीन परिक्रमा का विधान बताया गया है। वहीं, हनुमान जी की सात परिक्रमा करने का महत्व धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है। यह मान्यता स्थान और परंपरा के अनुसार थोड़ी भिन्न भी हो सकती है।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि परिक्रमा केवल संख्या पर आधारित नहीं होती, बल्कि श्रद्धा और भावना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। सही विधि और भक्ति भाव से की गई परिक्रमा व्यक्ति के मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। इसलिए पूजा के दौरान नियमों के साथ-साथ आस्था का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।



