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डाटा सेंटरों की बढ़ती भूख पर UN की चेतावनी

United Nations की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे डाटा सेंटर बिजली और पानी जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की खपत में बड़ी हिस्सेदारी लेने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण डाटा सेंटरों का विस्तार अभूतपूर्व गति से हो रहा है।

डाटा सेंटर इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और AI सेवाओं की रीढ़ माने जाते हैं। इन केंद्रों में हजारों सर्वर चौबीसों घंटे चलते रहते हैं, जिन्हें संचालित करने और ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI आधारित सेवाओं के विस्तार ने ऊर्जा खपत की रफ्तार को और तेज कर दिया है। बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models), मशीन लर्निंग सिस्टम और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने के लिए विशाल डाटा सेंटरों की जरूरत पड़ती है, जिससे ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कई आधुनिक डाटा सेंटर कूलिंग सिस्टम के लिए बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग करते हैं। जल-संकट वाले क्षेत्रों में नए डाटा सेंटर स्थापित होने से स्थानीय जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यही कारण है कि पर्यावरण विशेषज्ञ संसाधनों के टिकाऊ उपयोग पर जोर दे रहे हैं।

दूसरी ओर, तकनीकी कंपनियों का कहना है कि वे अधिक ऊर्जा-कुशल सर्वर, उन्नत कूलिंग तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग के माध्यम से अपने पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने का प्रयास कर रही हैं। कई बड़ी कंपनियां अपने डाटा सेंटरों को सौर और पवन ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में निवेश बढ़ा रही हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI का विस्तार आने वाले वर्षों में जारी रहेगा। ऐसे में सरकारों, नियामकों और तकनीकी कंपनियों के सामने चुनौती यह होगी कि तकनीकी प्रगति और संसाधनों के सतत उपयोग के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भविष्य की डिजिटल दुनिया को केवल तेज और शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि ऊर्जा और जल संसाधनों के प्रति अधिक जिम्मेदार भी बनाना होगा।

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