Gen-Z का सड़कों पर दबदबा, लेकिन राजनीति में युवाओं की भागीदारी कम

Gen-Z यानी नई पीढ़ी आज अपनी अलग पहचान बना रही है। रोजगार, शिक्षा, तकनीक, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक मुद्दों को लेकर युवा खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लेकर सड़कों तक उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन जब बात सीधे चुनावी राजनीति की आती है तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।
देश की संसद और विधानसभाओं में युवाओं की मौजूदगी अभी भी सीमित है। कुछ युवा चेहरे सांसद और विधायक बनकर राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उनकी संख्या कुल प्रतिनिधित्व की तुलना में काफी कम है। इसके पीछे कई कारण माने जाते हैं, जिनमें चुनाव लड़ने का खर्च, राजनीतिक अनुभव की कमी और पारंपरिक राजनीतिक ढांचे में प्रवेश की चुनौतियां शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में राजनीतिक जागरूकता तो बढ़ रही है, लेकिन उसे सक्रिय राजनीतिक भागीदारी में बदलने की जरूरत है। कई युवा सामाजिक आंदोलनों, डिजिटल कैंपेन और स्वयंसेवी गतिविधियों के जरिए अपनी भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन चुनावी मैदान में उतरने वाले युवाओं की संख्या अभी कम है।
राजनीतिक दल भी अब युवा वोटर्स के महत्व को समझ रहे हैं और युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, युवाओं को टिकट देने और नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया अभी भी धीमी मानी जाती है।
आने वाले समय में Gen-Z की बढ़ती जागरूकता भारतीय राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकती है। अगर ज्यादा युवा राजनीति में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं, तो नीति निर्माण और नेतृत्व में नई सोच को जगह मिल सकती है।



