लो-ग्लाइसेमिक डाइट से वजन घटाने और डायबिटीज कंट्रोल में मदद? जानें फायदे

अगर वजन घटाने के साथ ब्लड शुगर को भी बेहतर तरीके से मैनेज करना चाहते हैं, तो लो-ग्लाइसेमिक डाइट एक उपयोगी खानपान पैटर्न हो सकती है। इसमें ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाती है जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और जो भोजन के बाद ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे प्रभावित करते हैं।
लो-GI डाइट में साबुत अनाज, दालें, बीन्स, गैर-स्टार्च वाली सब्जियां, नट्स और बीज जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है। फाइबर पाचन को धीमा करने और भोजन के बाद ब्लड शुगर में तेज उछाल को कम करने में मदद कर सकता है।
डायबिटीज में कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। American Diabetes Association के अनुसार, सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन, फाइबर और पौष्टिक वसा का संतुलन ब्लड ग्लूकोज मैनेजमेंट में मदद कर सकता है।
वजन घटाने के लिहाज से भी सिर्फ किसी एक डाइट को ‘गेम चेंजर’ मानना सही नहीं होगा। कैलोरी की मात्रा, पोर्शन कंट्रोल, नियमित शारीरिक गतिविधि और लंबे समय तक डाइट को बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्वस्थ वजन कम होने से डायबिटीज मैनेजमेंट और A1C में सुधार में मदद मिल सकती है।
लो-GI डाइट अपनाते समय मिठाइयों, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट को सीमित करना और उनकी जगह फाइबर व प्रोटीन से भरपूर विकल्प चुनना बेहतर रहता है। हालांकि, डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को डाइट में बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि खानपान में बदलाव के साथ ब्लड शुगर और दवाओं की जरूरत भी बदल सकती है।



