Coaching System: संजीव सान्याल ने इसे बताया ‘माफिया’

EAC-PM के सदस्य संजीव सान्याल ने भारत के मौजूदा कोचिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बढ़ते कोचिंग कल्चर पर चिंता जताते हुए इसे ‘माफिया’ जैसा बताया। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि युवाओं को रोजगार और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी जरूरी है।
सान्याल के मुताबिक भारत में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों और कुछ चुनिंदा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगा देते हैं। इससे समय और संसाधनों का बड़ा हिस्सा केवल परीक्षा-केंद्रित तैयारी में खर्च हो सकता है। उन्होंने शिक्षा और रोजगार के बीच बेहतर संतुलन बनाने की जरूरत बताई।
अपने तर्क को समझाने के लिए सान्याल ने चीन का भी जिक्र किया। चीन में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बीच तालमेल बनाने के प्रयासों का उदाहरण देते हुए उन्होंने संकेत दिया कि भारत को भी युवाओं के लिए वैकल्पिक करियर और कौशल आधारित अवसरों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
कोचिंग संस्थानों के बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षा की गुणवत्ता और समान अवसर का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है। महंगी कोचिंग का खर्च हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में बेहतर सरकारी शिक्षा, डिजिटल संसाधन और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी माना जा सकता है।
सान्याल की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। उनका संदेश यह है कि भारत को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है जो छात्रों को केवल एक परीक्षा के लिए तैयार न करे, बल्कि उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए जरूरी ज्ञान, कौशल और अवसर भी दे।
कुल मिलाकर, कोचिंग सिस्टम पर संजीव सान्याल की टिप्पणी ने शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के मौजूदा मॉडल पर बहस को फिर तेज कर दिया है। उनके विचारों का केंद्र यह है कि युवाओं के लिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यापक, कौशल-आधारित और रोजगारोन्मुख बनाया जाना चाहिए।



