सीक्रेट ऑफ होर्मुज: अमेरिका ने कैसे जारी रखा तेल का रास्ता?

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा है। ईरान की ओर से मार्ग को बंद रखने की घोषणा और जहाजों पर हमलों के चलते सामान्य समुद्री यातायात काफी घट गया है। 20 अगस्त तक उपलब्ध शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को भी केवल नौ कमोडिटी जहाज इस मार्ग से गुजरे, जो सामान्य स्तर की तुलना में बहुत कम है।
इसी चुनौती के बीच अमेरिकी सेना ने कथित तौर पर गुप्त शिपिंग कॉरिडोर के जरिए तेल टैंकरों को होर्मुज से सुरक्षित निकालने में मदद की। Axios के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत रात में करीब 15-20 टैंकरों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने की व्यवस्था की गई। इसका उद्देश्य तेल की आपूर्ति को पूरी तरह बाधित होने से रोकना था।
इस ऑपरेशन में अमेरिकी सैन्य निगरानी और एस्कॉर्ट व्यवस्था की भूमिका बताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की समुद्री निगरानी क्षमता प्रभावित हुई, जिससे कुछ टैंकरों के लिए जलडमरूमध्य पार करना संभव हुआ। हालांकि, तेल का प्रवाह अभी भी संघर्ष से पहले के स्तर से काफी नीचे है।
होर्मुज का महत्व इसलिए भी बहुत ज्यादा है क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। 20 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब $93.81 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI भी बढ़कर करीब $88.16 पर पहुंचा।
हालांकि अमेरिका की यह रणनीति पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं है। जहाजों की आवाजाही अभी भी सीमित है और कई टैंकर ट्रैकिंग सिस्टम से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं। ऐसे में होर्मुज संकट का वैश्विक तेल बाजार पर असर बना हुआ है।
मुख्य बातें:
- होर्मुज में तेल टैंकरों की आवाजाही बेहद कम हुई।
- अमेरिका ने कथित तौर पर गुप्त शिपिंग कॉरिडोर बनाया।
- रात में 15-20 टैंकरों की आवाजाही सुरक्षित कराने का दावा।
- वैश्विक तेल सप्लाई को पूरी तरह ठप होने से रोकने की कोशिश।
- ब्रेंट क्रूड करीब $93.81 प्रति बैरल तक पहुंचा।
- ईरान-अमेरिका तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बरकरार।



