ईरान के साइबर हमलों से अमेरिका में बढ़ा खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच साइबर स्पेस भी एक नया युद्धक्षेत्र बनता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका के कई राज्यों में जल आपूर्ति और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े सिस्टम पर साइबर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। खास बात यह है कि इनका असर बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों की स्थानीय सेवाओं पर भी पड़ा है।
मिनेसोटा में 30 से अधिक सामुदायिक जल प्रणालियों को साइबर गतिविधियों से प्रभावित होने की जानकारी सामने आई। कुछ स्थानों पर पानी का दबाव प्रभावित हुआ और स्थानीय प्रशासन को वैकल्पिक प्रक्रियाओं का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पीने के पानी के दूषित होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को आशंका है कि इन हमलों के पीछे ईरान से जुड़े साइबर ऑपरेटर हो सकते हैं। हालांकि जांच अभी जारी है और अमेरिकी सरकार ने सभी हालिया हमलों को आधिकारिक तौर पर ईरानी सरकार के खाते में नहीं डाला है। इसी वजह से हमले के स्रोत को लेकर अभी सावधानी बरती जा रही है।
इन साइबर हमलों में जल संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट से जुड़े औद्योगिक नियंत्रण उपकरण खास निशाने पर रहे हैं। ये सिस्टम पानी के पंप, वाल्व और दबाव जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। अमेरिकी एजेंसियों ने ऐसे उपकरणों की सुरक्षा को लेकर पहले भी चेतावनी जारी की थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे शहरों की जल प्रणालियां साइबर हमलावरों के लिए अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य हो सकती हैं, क्योंकि कई स्थानीय यूटिलिटीज के पास बड़े संस्थानों की तुलना में सीमित बजट, पुराने उपकरण और कम साइबर सुरक्षा संसाधन होते हैं। इंटरनेट से जुड़े पुराने ऑपरेशनल सिस्टम जोखिम को और बढ़ा सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की साइबर सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है। जल आपूर्ति जैसी जरूरी सेवाओं को डिजिटल हमलों से बचाने के लिए सिस्टम को इंटरनेट से अलग रखना, मजबूत पासवर्ड और एक्सेस कंट्रोल लागू करना तथा लगातार निगरानी बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
ईरान से जुड़े संभावित साइबर हमलों का दायरा केवल जल प्रणालियों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर भी साइबर हमलावरों के निशाने पर आ सकते हैं। ऐसे में अमेरिका के लिए साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन गई है।



