यूपी में ‘एक एयरशेड, एक प्लान’ से प्रदूषण पर लगेगी लगाम

उत्तर प्रदेश सरकार ने वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ‘एक एयरशेड, एक प्लान’ की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस मॉडल में प्रदूषण को केवल किसी एक शहर की समस्या मानने के बजाय पूरे क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान कर संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी।
सरकार इस दिशा में चीन के बीजिंग मॉडल का अध्ययन भी कर रही है। एयरशेड आधारित व्यवस्था का उद्देश्य यह समझना है कि प्रदूषणकारी गतिविधियां एक शहर की सीमा तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि हवा के साथ आसपास के जिलों और क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
उत्तर प्रदेश में शुरू की गई क्लीन एयर मैनेजमेंट परियोजना भी इसी व्यापक दृष्टिकोण पर आधारित है। विश्व बैंक के सहयोग से करीब 2741 करोड़ रुपये की इस परियोजना में परिवहन, कृषि, उद्योग और अन्य प्रमुख क्षेत्रों से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर जोर दिया जाएगा।
प्रस्तावित एयरशेड मॉडल में कई जिलों और शहरों को एक साझा प्रदूषण क्षेत्र के रूप में देखकर योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे वाहनों, उद्योगों, निर्माण कार्य, कचरा जलाने और कृषि अवशेष जैसे अलग-अलग स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन पर एक साथ काम करने में मदद मिलेगी।
वायु गुणवत्ता की निगरानी को मजबूत करने के लिए राज्य में बड़ी संख्या में नए मॉनिटरिंग उपकरण लगाने की भी योजना है। विश्व बैंक के अनुसार यूपी में लगभग 200 नए वायु गुणवत्ता निगरानी यंत्र स्थापित किए जाने हैं।
इस पहल का लक्ष्य केवल प्रदूषण के स्तर को मापना नहीं, बल्कि उसके वास्तविक स्रोतों की पहचान कर समयबद्ध कार्रवाई करना है। यदि एयरशेड आधारित योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो अलग-अलग शहरों में चल रही प्रदूषण नियंत्रण गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकता है।
यूपी सरकार का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां कई शहर और जिले एक ही वायु क्षेत्र में आते हैं, वहां साझा रणनीति के जरिए स्वच्छ हवा के लक्ष्य को हासिल करने की संभावना बढ़ सकती है।



