सावन पुत्रदा एकादशी व्रत कथा 2026: राजा महीजित और लोमेश ऋषि की पूरी कहानी

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। सावन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, महिष्मती के राजा महीजित के पास धन-दौलत और वैभव की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वे संतान सुख से वंचित थे। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने कई उपाय किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार उनकी प्रजा ने इस समस्या का समाधान खोजने का प्रयास किया और उनकी मुलाकात लोमेश ऋषि से हुई।
राजा महीजित क्यों थे परेशान?
राजा महीजित अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखते थे और राज्य में सुख-शांति थी। इसके बावजूद उनके जीवन में एक बड़ा दुख था—उनकी कोई संतान नहीं थी। राजा और रानी ने संतान प्राप्ति के लिए कई धार्मिक कार्य किए, लेकिन उनकी मनोकामना पूरी नहीं हुई। राजा की चिंता देखकर मंत्री और प्रजा भी परेशान रहने लगे।
लोमेश ऋषि ने बताया कारण
राजा की परेशानी का समाधान जानने के लिए प्रजा के कुछ लोग जंगल में ऋषि-मुनियों के पास पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात लोमेश ऋषि से हुई। उन्होंने राजा की समस्या सुनकर बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा के पूर्व जन्म के कर्म उनके संतान सुख में बाधा बन रहे थे। इसके समाधान के लिए उन्होंने सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
प्रजा ने रखा पुत्रदा एकादशी का व्रत
लोमेश ऋषि की सलाह पर राजा की प्रजा ने पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की और श्रद्धापूर्वक व्रत रखा। व्रत पूरा होने के बाद उन्होंने उससे प्राप्त पुण्य राजा महीजित को समर्पित कर दिया। कथा के अनुसार, इसी पुण्य के प्रभाव से राजा की संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी हुई।
राजा के घर गूंजी किलकारी
कथा के अनुसार, पुत्रदा एकादशी के व्रत का पुण्य राजा को मिलने के बाद उनकी रानी ने गर्भधारण किया। कुछ समय बाद उन्होंने एक स्वस्थ और तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। लंबे समय से संतान की प्रतीक्षा कर रहे राजा के घर खुशियां लौट आईं और पूरे राज्य में उत्सव का माहौल बन गया।
पुत्रदा एकादशी की कथा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता में इस व्रत को खासतौर पर संतान सुख और संतान के कल्याण से जोड़ा गया है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा व्रत कथा का पाठ या श्रवण करते हैं। कथा में राजा महीजित का प्रसंग श्रद्धा, संयम और भगवान विष्णु की भक्ति के महत्व को दर्शाता है।
2026 में कब है पुत्रदा एकादशी?
2026 में सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त, रविवार को रखा जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणनाओं के अनुसार एकादशी तिथि 24 अगस्त की सुबह तक रहेगी। पूजा और व्रत-पारण का सही समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित है।
निष्कर्ष: सावन पुत्रदा एकादशी की कथा राजा महीजित, उनकी संतान की इच्छा और लोमेश ऋषि द्वारा बताए गए व्रत से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, भगवान विष्णु की पूजा और कथा श्रवण करने से संतान सुख तथा परिवार के कल्याण का आशीर्वाद मिलता है। यह मान्यता धार्मिक परंपरा पर आधारित है।


