Pithori Amavasya 2026: कुशाग्रहणी और पिठोरी अमावस्या कब है? जानें शुभ मुहूर्त और पितरों का महत्व

पिठोरी अमावस्या 2026: हिंदू पंचांग में भाद्रपद मास की अमावस्या को पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। कई क्षेत्रों में इसे कुशाग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने की परंपरा है। अमावस्या को पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। (navbharattimes.indiatimes.com)
पिठोरी अमावस्या कब है? पंचांग की गणना के अनुसार इस साल भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर 2026 को पड़ रही है। अमावस्या तिथि के आरंभ और समाप्त होने के समय के आधार पर स्नान-दान तथा पितृ कर्म का समय निर्धारित किया जाता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार सटीक मुहूर्त देखना उचित रहेगा।
कुशाग्रहणी अमावस्या का महत्व: इस दिन कुश घास एकत्र करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन एकत्र की गई कुश का इस्तेमाल वर्षभर होने वाले पितृ कर्म और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। पुराने समय में कुश को धार्मिक कर्मकांड की महत्वपूर्ण सामग्री माना जाता था। (navbharattimes.indiatimes.com)
पितरों के लिए क्यों खास है दिन? अमावस्या तिथि को पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पितृ तर्पण, भोजन और दान करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। अमावस्या पर पितृ कर्म की यह परंपरा अन्य अमावस्या तिथियों में भी देखी जाती है। (navbharattimes.indiatimes.com)
पिठोरी अमावस्या पर क्या करें?
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार पितरों का तर्पण करें।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्न का दान करें।
- पितरों के नाम से श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।
- परंपरा के अनुसार कुश का संग्रह करें और उसे सुरक्षित रखें।
इस दिन किए जाने वाले पितृ तर्पण, दान और अन्य धार्मिक कर्मकांड धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध परिणाम के रूप में नहीं लेना चाहिए। पूजा का मुख्य भाव अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना है।


