
पाकिस्तान में सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तनाव के बीच JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर परोक्ष रूप से तीखा निशाना साधा है। पेशावर में पार्टी के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने सैन्य प्रतिष्ठान की ताकत और बड़े-बड़े दावों पर सवाल उठाते हुए देश की मौजूदा स्थिति का जिक्र किया।
फजलुर रहमान ने अपने भाषण में 1971 के युद्ध को याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से आखिरी दम तक लड़ने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद ढाका में पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया था। 16 दिसंबर 1971 को करीब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण के बाद पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना।
उन्होंने तत्कालीन सैन्य शासक जनरल याह्या खान के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने सड़कों, रेगिस्तान, खेतों, कारखानों और पहाड़ों में लड़ाई जारी रखने की बात कही थी। फजलुर रहमान ने मौजूदा सैन्य नेतृत्व के दावों की तुलना उस दौर से करते हुए कहा कि ऐसे बड़े-बड़े दावे पहले भी सुने जा चुके हैं।
फजलुर रहमान ने पाकिस्तान में आम लोगों की परेशानियों और लगातार जारी हिंसा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक अत्याचार और खून-खराबे का सिलसिला जारी रहने से देश की भौगोलिक स्थिति में बदलाव जैसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
उनके इस बयान को पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ अब तक की तीखी राजनीतिक टिप्पणियों में से एक माना जा रहा है। 1971 का संदर्भ देकर उन्होंने मौजूदा नेतृत्व को इतिहास से सबक लेने का संदेश देने की कोशिश की है।



