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Adani AGM: अडानी समूह की न्यूक्लियर पावर सेक्टर में एंट्री, 2035 तक 10 GW क्षमता का लक्ष्य

Gautam Adani की अगुवाई वाला Adani Group अब ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। समूह ने अपनी वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान संकेत दिया कि वह परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) क्षेत्र में अवसर तलाश रहा है और वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखता है।

अडानी समूह पहले से ही सौर, पवन और ट्रांसमिशन जैसे ऊर्जा क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर चुका है। अब परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में संभावित प्रवेश को कंपनी की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

क्यों अहम है यह कदम?

  • भारत की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद।
  • कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को समर्थन।
  • ऊर्जा स्रोतों में विविधता।
  • बेसलोड पावर सप्लाई को मजबूती।
  • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान।

2035 तक 10 GW का लक्ष्य

10 GW की परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य बेहद महत्वाकांक्षी माना जा रहा है। भारत सरकार भी स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण (Clean Energy Mix) में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में निजी क्षेत्र की भागीदारी भविष्य में इस सेक्टर को नई गति दे सकती है।

हालांकि भारत में परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं अत्यधिक विनियमित (Regulated) होती हैं और इनके लिए सरकारी मंजूरी, तकनीकी साझेदारी तथा सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इसलिए अडानी समूह की योजनाओं को जमीन पर उतरने में समय लग सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश के एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है और देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण समर्थन मिलेगा।

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