BRICS में भारत दूसरा बेस्ट, फिर भी क्यों बोले सुरजीत भल्ला?

BRICS के मंच पर भारत की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हुई है, लेकिन अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला का मानना है कि देश को इससे संतुष्ट नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक भारत का प्रदर्शन बेहतर है, फिर भी वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए काफी कुछ करना बाकी है।
भल्ला ने भारत को BRICS का दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला देश बताया है। हालांकि उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि चीन की तुलना में भारत अभी काफी पीछे है और समूह की आर्थिक तस्वीर पर चीन का प्रभाव बहुत अधिक है।
BRICS के व्यापार आंकड़े भी इस अंतर को दिखाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार समूह की वैश्विक वस्तु निर्यात में हिस्सेदारी 2011 के करीब 23 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 25 प्रतिशत हुई, लेकिन चीन को हटाने पर बाकी BRICS देशों की हिस्सेदारी 12.4 प्रतिशत से घटकर 10.1 प्रतिशत रह गई।
यही वजह है कि भल्ला के मुताबिक भारत के सामने सिर्फ तेज आर्थिक विकास बनाए रखने की चुनौती नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना भी जरूरी है। भारत को निर्यात, निवेश और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
भारत और BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, लेकिन इसके साथ व्यापार घाटा भी बड़ी चिंता बनकर सामने आया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक FY2026 में BRICS देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 226.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
चीन इस पूरे समीकरण में सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। भारत की चीन के साथ बड़ी व्यापारिक असमानता है और कई क्षेत्रों में आयात का स्तर काफी ऊंचा है। ऐसे में भारत के लिए BRICS के भीतर अपनी आर्थिक भूमिका को और मजबूत करना बड़ी चुनौती है।
भल्ला की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 2026 का शिखर सम्मेलन भी चर्चा में है। भारत BRICS को वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत करने और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार के मंच के तौर पर देखता है।
कुल मिलाकर, BRICS में दूसरा स्थान भारत की आर्थिक ताकत का संकेत जरूर है, लेकिन सुरजीत भल्ला का संदेश साफ है कि यह पर्याप्त नहीं है। भारत को चीन के मुकाबले अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात, वैश्विक निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी हिस्सेदारी को तेजी से मजबूत करना होगा।



