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Economic Survey 2026: भारत की ‘न्यू नॉर्मल’ ग्रोथ 7%, GDP से महंगाई तक पूरी तस्वीर

Economic Survey 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा को लेकर एक व्यापक और आशावादी तस्वीर पेश की गई है। सर्वे के अनुसार भारत की ‘न्यू नॉर्मल’ आर्थिक वृद्धि दर अब लगभग 7 प्रतिशत के आसपास मानी जा रही है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश की मजबूत आंतरिक मांग, निवेश में बढ़ोतरी और संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है। इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि बीते वर्षों में किए गए सुधारों—जैसे जीएसटी, डिजिटल भुगतान, बुनियादी ढांचे में निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा—ने अर्थव्यवस्था को ज्यादा लचीला बनाया है। GDP के मोर्चे पर सर्वे का आकलन है कि मध्यम अवधि में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रह सकता है। महंगाई को लेकर सर्वे में संतुलित रुख दिखता है, जहां खाद्य और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद औसत महंगाई दर को नियंत्रित रखने की बात कही गई है। रिजर्व बैंक और सरकार के समन्वित प्रयासों से कीमतों पर दबाव सीमित रहने का अनुमान जताया गया है। रोजगार सृजन को लेकर इकोनॉमिक सर्वे में सेवा क्षेत्र, स्टार्टअप इकोसिस्टम और मैन्युफैक्चरिंग की अहम भूमिका रेखांकित की गई है। खास तौर पर MSME सेक्टर, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को भविष्य के रोजगार इंजन के रूप में देखा गया है। निवेश के संदर्भ में सर्वे बताता है कि निजी निवेश धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है, जबकि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय ने ग्रोथ को सहारा दिया है। विदेशी निवेश को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं, जहां भारत को स्थिर नीतिगत माहौल और बड़े उपभोक्ता बाजार का लाभ मिल रहा है। कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु अनुकूल खेती और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया गया है, ताकि ग्रामीण आय में स्थायी बढ़ोतरी हो सके। कुल मिलाकर Economic Survey 2026 भारत की अर्थव्यवस्था को ‘सावधानी के साथ आशावाद’ के रास्ते पर बताता है, जहां 7% की न्यू नॉर्मल ग्रोथ के साथ समावेशी विकास, महंगाई नियंत्रण और रोजगार सृजन सरकार की प्रमुख प्राथमिकताएं बनी रहेंगी।

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