SEBI की चेतावनी के बाद निवेशकों में हड़कंप | गोल्ड खरीद में 60% की गिरावट

हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा जारी चेतावनी के बाद सोने में निवेश करने वाले लोगों में भारी घबराहट देखने को मिली है। कई निजी कंपनियां और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऐसे गोल्ड निवेश मॉडल चला रहे थे, जिनमें ग्राहकों को मामूली रकम के बदले बड़े रिटर्न का लालच दिया जा रहा था। SEBI ने इन अनियमित और गैर-मान्यता प्राप्त स्कीमों को लेकर निवेशकों को सतर्क किया, जिसके बाद बाजार में सोना खरीदने की रफ्तार अचानक 60% तक गिर गई।
रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक जिन्होंने इन योजनाओं के माध्यम से सोना खरीदा था, वे डर के माहौल में अपना निवेश वापस निकालने की कोशिश कर रहे हैं। कई लोगों को आशंका है कि कहीं उनके पैसे फंस न जाएं या स्कीम अचानक बंद न हो जाए। इस डर के चलते सोने की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। खास बात यह है कि महिलाएं और मध्यमवर्गीय परिवार, जो त्योहारों और लंबे निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदते हैं, वे भी अब सतर्क हो गए हैं।
SEBI ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि किसी भी तरह की गोल्ड निवेश स्कीम में पैसा लगाने से पहले यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि वह योजना रेगुलेटेड है या नहीं। कई कंपनियां ‘डिजिटल गोल्ड’, ‘मंथली गोल्ड सेविंग प्लान’ और ‘गोल्ड रिवार्ड स्कीम’ जैसे नामों से ऐसे उत्पाद बेच रही हैं, जबकि इन पर किसी प्रकार की कानूनी निगरानी नहीं होती। यदि स्कीम विफल हो जाए तो निवेशक अपने पैसे वापस नहीं ले सकते, यही कारण है कि SEBI ने निवेशकों को सावधान रहने की सलाह दी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है, लेकिन इससे निवेशकों का भरोसा जरूर प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे केवल बैंक, सरकारी संस्थान या मान्यता प्राप्त वित्तीय प्लेटफॉर्म पर ही गोल्ड खरीदें। सरकारी गोल्ड बॉन्ड (SGB), गोल्ड ETF और फिजिकल गोल्ड ही अभी सुरक्षित विकल्प माने जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि पहले से ही ऐसी चेतावनी मिल जाती तो वे इन स्कीमों में पैसा लगाने से बच सकते थे। फिलहाल, SEBI की चेतावनी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और सोने की अनियमित बिक्री पर बड़ी रोक देखने को मिल रही है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में गोल्ड मार्केट पर इसका प्रभाव और भी गहरा हो सकता है।



