LNG खरीद पर भारत समेत एशियाई देशों ने खर्च किए ₹71,000 करोड़

हॉर्मुज संकट का असर एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर साफ दिखाई दिया। LNG की आपूर्ति प्रभावित होने और बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के कारण भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए स्पॉट मार्केट से LNG खरीदनी पड़ी। इस दौरान कीमतें सामान्य स्तर से काफी अधिक रहीं और इन देशों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। करीब ₹71,000 करोड़ की यह खरीद बताती है कि वैश्विक ऊर्जा संकट का असर किस तरह आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन लागत पर पड़ सकता है।
LNG यानी Liquefied Natural Gas की कीमतों में तेजी का सीधा असर उन देशों पर पड़ा जो अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं। हॉर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने से समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी, जिसका असर वैश्विक LNG बाजार पर भी देखने को मिला।
भारत के लिए LNG बिजली उत्पादन, उद्योग, उर्वरक और शहरी गैस वितरण जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। ऐसे में घरेलू मांग पूरी करने के लिए कंपनियों को महंगी LNG खरीदने का सहारा लेना पड़ा। स्पॉट मार्केट में खरीदारी की लागत बढ़ने से आयात बिल पर भी दबाव बढ़ा।
पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्थिति भी ऐसी ही रही। दोनों देश अपनी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयातित LNG से पूरा करते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ीं, तो इन देशों के लिए LNG खरीदना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, LNG की कीमत केवल उत्पादन लागत से तय नहीं होती, बल्कि वैश्विक मांग, उपलब्ध सप्लाई, समुद्री परिवहन लागत और भू-राजनीतिक तनाव का भी बड़ा प्रभाव पड़ता है। हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान बाजार में कीमतों को तेजी से प्रभावित कर सकता है।
स्पॉट मार्केट से LNG खरीदने का मतलब है कि खरीदार मौजूदा बाजार कीमत पर गैस हासिल करता है। जब बाजार में अचानक कीमतें बढ़ती हैं, तो ऐसी खरीदारी का खर्च भी तेजी से बढ़ जाता है। यही वजह है कि संकट के समय एशियाई देशों को LNG के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा।
इस बढ़ी हुई लागत का असर आगे चलकर बिजली उत्पादन, उद्योगों की लागत और गैस से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक LNG सप्लाई कितनी जल्दी सामान्य होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें किस स्तर पर स्थिर होती हैं।
कुल मिलाकर, करीब ₹71,000 करोड़ की LNG खरीद एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करती है। यह स्थिति यह भी बताती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं किस तरह हजारों किलोमीटर दूर बैठे देशों के ऊर्जा आयात बिल और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।



