जगजीत सिंह की खोज थे कुमार सानू, होटल में करते थे काम

कुमार सानू का नाम हिंदी सिनेमा के उन गायकों में शामिल है, जिन्होंने 90 के दशक में अपनी आवाज से संगीत की दुनिया पर गहरी छाप छोड़ी। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी कहानी आसान नहीं थी। संघर्ष के दिनों में उन्हें काम की तलाश में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और मुंबई में अपनी पहचान बनाने के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ी।
कुमार सानू के करियर में जगजीत सिंह की भूमिका बेहद खास रही। एक पुराने इंटरव्यू में सानू ने बताया था कि जगजीत सिंह ने उनकी आवाज सुनी तो काफी प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने सानू को अपने घर बुलाया और गाना सुनने के बाद उन्हें रिकॉर्डिंग के लिए अपने साथ स्टूडियो ले गए।
यही मुलाकात आगे चलकर कुमार सानू के लिए बड़ा मोड़ साबित हुई। जगजीत सिंह उन्हें संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी से मिलवाने ले गए। उनकी आवाज पसंद आने के बाद सानू को फिल्मी दुनिया में काम करने का मौका मिला। इसी दौर में उनका नाम भी कुमार सानू रखा गया।
इसके बाद कुमार सानू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आशिकी, साजन, दीवाना, बाजीगर और 1942: ए लव स्टोरी जैसी फिल्मों के गीतों ने उन्हें 90 के दशक का सबसे लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर बना दिया। उन्होंने लगातार पांच साल फिल्मफेयर का बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड भी जीता।
कुमार सानू की आवाज का जादू ऐसा था कि रोमांटिक गीतों से लेकर दर्द भरे नगमों तक, हर तरह के गानों में उनकी आवाज दर्शकों के दिल तक पहुंचती थी। बाद में उन्होंने हिंदी के अलावा कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी गाने रिकॉर्ड किए।
जगजीत सिंह खुद भारतीय गजल संगीत के सबसे लोकप्रिय नामों में रहे। उन्होंने गजल को आम श्रोताओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनकी आवाज में गाए कई गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
कुमार सानू के संघर्ष से सफलता तक के सफर में जगजीत सिंह की मदद को आज भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। एक बड़े कलाकार ने दूसरे उभरते कलाकार की प्रतिभा पहचानी और उसे सही मंच तक पहुंचाने में मदद की—यही इस कहानी की सबसे खास बात है।



