
नेपाल इन दिनों भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड की तबाही से जूझ रहा है। बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान के बीच भारत ने संकट की घड़ी में पड़ोसी देश की मदद के लिए तेजी से राहत अभियान शुरू किया है। भारत की ओर से लगातार राहत सामग्री और जरूरी सहायता नेपाल पहुंचाई जा रही है।
भारत ने अब तक कई विमानों के जरिए टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाओं सहित जरूरी राहत सामग्री भेजी है। हाल की खेप के साथ भारत की ओर से भेजी गई कुल राहत सामग्री करीब 68 टन तक पहुंच गई है।
भारत की सहायता केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है। मेडिकल और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल भेजी गई है, जबकि बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुलों और जरूरी संपर्क व्यवस्था को बहाल करने में भी सहयोग की तैयारी है।
नेपाल में मौजूदा आपदा को बेहद गंभीर माना जा रहा है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में संपर्क टूट गया है और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव अभियान में नेपाली सुरक्षाबलों के साथ भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी सहयोग कर रही हैं।
नेपाल के लिए भारत की यह मदद नई नहीं है। वर्ष 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भी भारत ने ‘ऑपरेशन मैत्री’ के तहत बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया था। भारतीय सेना, वायुसेना और एनडीआरएफ ने बचाव, चिकित्सा सहायता और भारतीय नागरिकों की निकासी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मौजूदा बाढ़ संकट में भारत की त्वरित प्रतिक्रिया दोनों देशों के करीबी संबंधों को भी रेखांकित करती है। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत प्राकृतिक आपदाओं के समय अपने पड़ोसी देशों को मानवीय सहायता देने पर जोर देता रहा है। नेपाल में हालात सामान्य होने तक भारत की राहत और पुनर्वास संबंधी मदद जारी रहने की उम्मीद है।



