
राहुल गांधी के चाय की दुकानों पर जाति के आधार पर अलग-अलग कप इस्तेमाल किए जाने के दावे पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि कुछ जगहों पर दलितों को अलग कप में चाय दी जाती है। इस दावे पर भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की।
प्रदीप भंडारी दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक चाय की दुकान पर पहुंचे और वहां दुकानदार से अलग-अलग तरह के कपों के इस्तेमाल के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या ग्राहकों को उनकी जाति के आधार पर अलग कप में चाय दी जाती है।
दुकानदार ने जाति के आधार पर कप अलग रखने की बात से इनकार किया। दुकान पर डिस्पोजेबल और दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले कप मौजूद थे। दुकानदार के मुताबिक कपों का इस्तेमाल उनकी प्रकृति और उपयोग के हिसाब से होता है, किसी ग्राहक की जाति के आधार पर नहीं।
प्रदीप भंडारी ने अपने वीडियो में राहुल गांधी के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए जमीन पर जाकर देखना जरूरी है। उन्होंने चाय की दुकान से चाय भी ली और डिजिटल भुगतान के जरिए इसकी कीमत चुकाई।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब जातिगत भेदभाव और सामाजिक समानता को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। राहुल गांधी ने अलग कप की व्यवस्था को कथित जातिगत भेदभाव का उदाहरण बताया था, जबकि भाजपा नेता इसे गलत और समाज को बांटने वाला दावा बता रहे हैं।
प्रदीप भंडारी के इस फैक्ट चेक के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, एक दुकान की पड़ताल से पूरे देश या पूरे उत्तर प्रदेश में जातिगत भेदभाव की स्थिति पर व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस विवाद का केंद्र फिलहाल राहुल गांधी के दावे और भाजपा की ओर से किए गए प्रतिवाद पर है।



