राम मंदिर ट्रस्ट: चंपत राय बेदाग, बोले महंत गोविंद देव गिरि

अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर चल रहे विवाद के बीच नए महासचिव महंत गोविंद देव गिरि ने पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। गिरि के मुताबिक चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए लंबे समय तक समर्पण के साथ काम किया है।
महंत गोविंद देव गिरि ने कहा कि चंपत राय का सरल स्वभाव और लोगों पर सहज विश्वास करना उनके लिए परेशानी का कारण बना। उन्होंने जिन लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा किया, उन्हीं लोगों ने विश्वासघात किया। गिरि ने इस पूरे घटनाक्रम में चंपत राय की व्यक्तिगत नीयत पर सवाल उठाने से इनकार किया।
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के संदर्भ में गिरि ने माना कि व्यवस्था और निगरानी में कमियां रही हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि चंपत राय की छवि पर इसका असर नहीं पड़ता। उनके अनुसार चंपत राय ने मंदिर आंदोलन के लिए अपना जीवन समर्पित किया और मौजूदा परिस्थितियों में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से हटने का फैसला किया।
महंत गोविंद देव गिरि ने यह भी कहा कि चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और जो लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की।
राम मंदिर ट्रस्ट में नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी महंत गोविंद देव गिरि ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि नए सीईओ जितेंद्र मिश्र अयोध्या में मौजूद हैं और मंदिर की व्यवस्था से संबंधित कार्यों को समझ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महासचिव और सीईओ के बीच कामकाज को लेकर किसी तरह का मतभेद नहीं होगा।
नई व्यवस्था में ट्रस्ट और सीईओ की भूमिकाओं को अलग-अलग तरीके से निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। ट्रस्ट नीतिगत और मंदिर व्यवस्था से जुड़े फैसले करेगा, जबकि सीईओ उनके प्रभावी क्रियान्वयन और संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे अयोध्या में मंदिर प्रशासन को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास माना जा रहा है।
महंत गोविंद देव गिरि के बयान से साफ है कि ट्रस्ट चंपत राय के लंबे योगदान को अलग नजरिए से देख रहा है। एक ओर चढ़ावे से जुड़े मामले में जांच और जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चंपत राय के मंदिर आंदोलन में योगदान और उनकी व्यक्तिगत छवि का बचाव किया जा रहा है।



