
राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। अब प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पित किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स पर उद्घाटन के बाद भी लगातार नजर रखी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स की छह महीने तक सख्त निगरानी की जाएगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क परियोजनाएं उद्घाटन के बाद शुरुआती महीनों में ही खराब न हों। हाल के दिनों में कुछ नए या हाल में शुरू किए गए हाईवे प्रोजेक्ट्स पर सड़क की गुणवत्ता और शुरुआती खराबियों को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे मामलों के बाद NHAI ने गुणवत्ता नियंत्रण को प्राथमिकता दी है।
छह महीने की निगरानी अवधि में सड़क की सतह, निर्माण गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है। किसी प्रोजेक्ट में शुरुआती स्तर पर कमी मिलने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने का प्रयास किया जाएगा।
NHAI की यह पहल केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निर्माण में लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया जा रहा है। दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के एक हिस्से में सड़क धंसने के बाद NHAI ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।
नई व्यवस्था से ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों पर भी बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। परियोजना पूरी होने और लोकार्पण के बाद जिम्मेदारी समाप्त मानने के बजाय शुरुआती छह महीनों के प्रदर्शन को भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
हाईवे निर्माण में सड़क की मजबूती के साथ ड्रेनेज और मौसम संबंधी परिस्थितियों का भी बड़ा महत्व होता है। बारिश के दौरान जलभराव या खराब जल निकासी के कारण सड़क की संरचना प्रभावित हो सकती है। इसलिए निगरानी के दौरान इन पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी होगा।
NHAI पहले ही बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। 20 किलोमीटर से अधिक लंबे और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाले हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए Automated and Intelligent Machine-Aided Construction (AI-MC) तकनीक को अनिवार्य करने का फैसला भी गुणवत्ता सुधार की दिशा में उठाया गया कदम है।
इस नई निगरानी व्यवस्था से राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री के लोकार्पण के बाद छह महीने तक प्रोजेक्ट की स्थिति पर नजर रखने से शुरुआती खामियों की पहचान और उनके समाधान में तेजी लाई जा सकेगी।
कुल मिलाकर NHAI का यह फैसला देश में हाईवे निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस निगरानी मॉडल के आधार पर परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर अधिक जवाबदेही देखने को मिल सकती है।



