
यूरोप के छोटे लेकिन रणनीतिक देश अल्बानिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ बनाई गई एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘डिजिटल मंत्री’ की परियोजना अब खुद विवादों में घिर गई है। जिस तकनीक को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और रिश्वतखोरी पर लगाम लगाने के लिए लागू किया गया था, उसी को बनाने वाली एजेंसी के दो वरिष्ठ अधिकारियों को हाउस अरेस्ट में रखा गया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने सरकारी ठेकों के बदले निजी कंपनियों से भारी रिश्वत ली। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ अल्बानिया बल्कि पूरे यूरोप में AI के इस्तेमाल और उसकी निगरानी को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
अल्बानिया सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करने के उद्देश्य से डिजिटल गवर्नेंस और AI टूल्स को तेजी से अपनाया था। इसी कड़ी में एक AI आधारित सिस्टम विकसित किया गया, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘AI मंत्री’ कहा जाने लगा। इसका काम सरकारी टेंडर, बजट आवंटन और परियोजनाओं की निगरानी करना था, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो और फैसले डेटा के आधार पर हों। सरकार का दावा था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं घटेंगी।
हालांकि जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस AI सिस्टम को विकसित और संचालित करने वाली एजेंसी के दो शीर्ष अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने कुछ कंपनियों को सरकारी ठेके दिलाने के बदले मोटी रकम ली और AI सिस्टम के एल्गोरिदम व डेटा प्रोसेसिंग में हेरफेर की। प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिनके आधार पर अदालत ने दोनों अधिकारियों को हाउस अरेस्ट का आदेश दिया।
इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या AI वास्तव में भ्रष्टाचार खत्म कर सकता है या फिर अगर इसे गलत हाथों में सौंप दिया जाए तो यह भी भ्रष्टाचार का औजार बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक खुद न तो ईमानदार होती है और न ही बेईमान, बल्कि उसे संचालित करने वाले लोगों की नीयत अहम होती है। अल्बानिया का यह मामला अन्य देशों के लिए भी एक चेतावनी है कि AI आधारित प्रशासनिक सुधारों के साथ मजबूत कानूनी ढांचा, स्वतंत्र निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था भी जरूरी है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी पारदर्शिता से होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



