
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजरायल ईरान के परमाणु ठिकानों को लेकर बड़ी रणनीतिक तैयारी कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि दोनों देश जरूरत पड़ने पर ईरान के न्यूक्लियर साइट्स को सुरक्षित करने या उन पर नियंत्रण पाने के लिए स्पेशल फोर्स तैनात करने की योजना बना सकते हैं। इस खबर के सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा वैश्विक स्तर पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल को लंबे समय से यह चिंता रही है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सैन्य क्षमता तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। लेकिन पश्चिमी देशों और विशेष रूप से इजरायल को इस दावे पर भरोसा नहीं है। इसी कारण समय-समय पर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले या कार्रवाई की संभावना को लेकर चर्चाएं सामने आती रहती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है और यह आशंका बढ़ती है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच गया है, तो अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से विशेष सैन्य अभियान चला सकते हैं। इस अभियान में स्पेशल फोर्स को ईरान के संवेदनशील परमाणु स्थलों पर भेजकर वहां की गतिविधियों को रोकने या नियंत्रण में लेने की रणनीति अपनाई जा सकती है। हालांकि अभी तक इस तरह की किसी आधिकारिक योजना की पुष्टि नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ेगा। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उसके परमाणु ठिकानों या सैन्य ढांचे पर किसी भी हमले का वह कड़ा जवाब देगा। ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।



