
स्तन कैंसर (Breast Cancer) दुनियाभर में महिलाओं के बीच सबसे आम कैंसर के रूप में सामने आ रहा है। भारत में भी हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं। ऐसे में टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) की एक हालिया स्टडी ने नई उम्मीद जगाई है। इस अध्ययन में पता चला है कि एक कम कीमत वाली दवा स्तन कैंसर के इलाज में बेहद प्रभावी साबित हो सकती है। खास बात यह है कि यह दवा मौजूदा महंगी थेरेपी की तुलना में सस्ती होने के साथ-साथ उतनी ही असरदार भी है।
टीएमसी की इस स्टडी में देशभर के कई प्रमुख मेडिकल संस्थानों ने भाग लिया। शोधकर्ताओं ने लगभग 3,000 मरीजों पर इस दवा का परीक्षण किया और पाया कि इसके प्रयोग से कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। दवा के उपयोग से मरीजों को रेडिएशन या कीमोथेरेपी की आवश्यकता भी पहले की तुलना में कम पड़ रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि यह दवा व्यापक स्तर पर उपयोग में लाई जाती है, तो इससे न केवल मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि इलाज की सफलता दर भी बढ़ेगी। अभी तक स्तन कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली कई दवाएं विदेशी कंपनियों से आयात करनी पड़ती हैं, जिनकी कीमत बहुत अधिक होती है। ऐसे में भारत में निर्मित यह सस्ती दवा मरीजों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है।
टाटा मेमोरियल सेंटर के प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया कि आने वाले महीनों में इस दवा के बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल किए जाएंगे, ताकि इसे राष्ट्रीय कैंसर उपचार प्रोटोकॉल में शामिल किया जा सके। यदि परिणाम सकारात्मक रहे, तो यह खोज स्तन कैंसर उपचार की दिशा बदल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और समय पर जांच के साथ-साथ सस्ती और प्रभावी दवाओं की उपलब्धता से भारत में स्तन कैंसर की मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। टीएमसी की यह स्टडी आने वाले समय में कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीद की किरण बनकर उभर रही है।



