
Defence Budget 2026 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रक्षा बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिसका सीधा लाभ देश की सेनाओं और स्वदेशी डिफेंस उद्योग को मिलेगा। इस बजट का सबसे बड़ा फोकस ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के निर्माण, अनुसंधान और आधुनिकीकरण पर रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में हथियारों, गोला-बारूद, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और आधुनिक तकनीक का अधिकतम उत्पादन देश में ही किया जाएगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो और रक्षा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हों। Defence Budget 2026 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए अतिरिक्त फंड का प्रावधान किया गया है, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वॉरफेयर, स्पेस डिफेंस और हाइपरसोनिक तकनीक जैसे भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में भारत अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सके। इसके साथ ही निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को रक्षा उत्पादन से जोड़ने के लिए नई नीतियों को बढ़ावा दिया गया है, जिससे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए इनोवेशन को गति मिलेगी। थलसेना, नौसेना और वायुसेना के आधुनिकीकरण के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनमें नए फाइटर जेट्स, अत्याधुनिक सबमरीन, युद्धपोत और सीमा सुरक्षा से जुड़े उपकरण शामिल हैं। सरकार का मानना है कि मजबूत रक्षा ढांचा न सिर्फ देश की सीमाओं को सुरक्षित करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक भरोसेमंद डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करेगा। Defence Budget 2026 में सैनिकों के कल्याण, पेंशन और बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया है, जिससे सशस्त्र बलों का मनोबल और कार्यक्षमता दोनों मजबूत हों। कुल मिलाकर, यह बजट भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देने, तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।



