
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान एक ऐसा बयान दिया जिसने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कथित “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर कहा कि “उस वक्त की स्थिति ऐसी थी कि पता नहीं कौन जिंदा रहता।” उनके इस बयान को पाकिस्तान की हालिया राजनीतिक अस्थिरता और पड़ोसी देशों के साथ बढ़ते तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत एक अनौपचारिक मीटिंग के दौरान हुई, जहां शहबाज शरीफ ने ट्रंप से पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति, आर्थिक संकट और सैन्य अभियानों को लेकर चर्चा की। बातचीत के दौरान उन्होंने यह स्वीकार किया कि “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान हालात बेहद भयावह थे और उस समय पाकिस्तान गंभीर सैन्य एवं राजनीतिक दबाव में था। हालांकि उन्होंने इस “ऑपरेशन सिंदूर” के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया, लेकिन उनके लहजे से यह साफ झलक रहा था कि यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था।
ट्रंप ने इस पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान से स्थिरता बनाए रखने और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की। वहीं अमेरिकी मीडिया ने इस मुलाकात को पाकिस्तान की “कूटनीतिक मदद की गुहार” बताया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शहबाज शरीफ का यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है। विपक्षी दलों ने पहले ही शरीफ सरकार पर देश की नीतियों में कमजोरी और विदेशी दबाव में फैसले लेने का आरोप लगाया है। इस बयान के बाद उन्हें एक बार फिर घेरने की तैयारी की जा रही है।
भारत में भी इस टिप्पणी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख भारत-पाक संबंधों से जुड़ा हो सकता है, जबकि कुछ इसे पाकिस्तान की सेना के अंदरूनी संघर्ष का प्रतीक मान रहे हैं।
फिलहाल पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बयान पर कोई औपचारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि शहबाज शरीफ का यह भावनात्मक बयान न केवल पाकिस्तान के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में आ गया है।



