
गुजरात की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है, क्योंकि राज्य में कल कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में बनने वाले नए मंत्रिमंडल में लगभग 10 नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी हाईकमान ने इस विस्तार को मंजूरी दे दी है और पार्टी अब जातीय संतुलन के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी प्राथमिकता देने जा रही है।
इस कैबिनेट विस्तार के जरिए सरकार न सिर्फ संगठनात्मक संतुलन साधना चाहती है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जनता के बीच एक नया संदेश देना भी चाहती है। माना जा रहा है कि इस विस्तार में युवा चेहरों को तरजीह दी जाएगी, ताकि सरकार की छवि गतिशील और विकासोन्मुख बने। साथ ही, महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा देने की मंशा है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, इस विस्तार में सौराष्ट्र, दक्षिण गुजरात और उत्तर गुजरात के कुछ विधायकों को मंत्री पद मिलने की संभावना है। इन क्षेत्रों से आए नेताओं का कहना है कि पिछली बार उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम रहा था, इसलिए अब पार्टी इस असंतुलन को दूर करना चाहती है। इसके अलावा, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर उन विधायकों को भी जगह मिल सकती है जिन्होंने संगठन और जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई है।
शपथग्रहण समारोह राज्यपाल भवन, गांधीनगर में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हाल ही में दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की थी, जिसके बाद इस विस्तार को अंतिम रूप दिया गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने हाईकमान को संभावित मंत्रियों की सूची सौंप दी है, जिसमें नए चेहरों के साथ कुछ पुराने मंत्रियों का पुन: समावेश भी हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सरकार के लिए अपनी कार्यशैली में नया जोश भरने का मौका होगा। भाजपा इस कदम के जरिए राज्य में विपक्ष पर भी दबाव बनाना चाहती है और जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि विकास की रफ्तार अब और तेज़ होगी। कुल मिलाकर, गुजरात का यह कैबिनेट विस्तार आगामी चुनावी समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।



