
भारत की रक्षा उत्पादन नीति में बीते कुछ वर्षों में जो व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं, उसका नतीजा अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। देश की डिफेंस प्रोडक्शन (रक्षा उत्पादन) ने 2024-25 के वित्तीय वर्ष में ऐतिहासिक 1.5 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियानों के तहत सरकार की रणनीतिक पहल का ठोस परिणाम है।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने की। उन्होंने बताया कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण निर्यातक और निर्माता बनता जा रहा है। उनका कहना था कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना न सिर्फ देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह आर्थिक मजबूती और वैश्विक रणनीतिक स्थिति के लिहाज़ से भी अहम है।
राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि सरकार का अगला लक्ष्य 2027 तक रक्षा उत्पादन को 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाना है। इसके लिए प्राइवेट सेक्टर, स्टार्टअप्स और MSMEs की भागीदारी को और भी अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि डिफेंस सेक्टर में 400 से अधिक कंपनियां अब सक्रिय रूप से निर्माण कार्य में लगी हुई हैं, जिनमें कई इनोवेटिव स्टार्टअप्स भी शामिल हैं।
डिफेंस प्रोडक्शन में यह उछाल केवल परंपरागत हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य उपकरण, और एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम भी शामिल हैं। HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड), DRDO, और BEL जैसी कंपनियों के साथ-साथ अब कई निजी कंपनियां भी बड़े प्रोजेक्ट्स में साझेदार बनी हैं।
भारत अब न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि कई देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात भी कर रहा है। 2024-25 में रक्षा निर्यात का आंकड़ा भी 20,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। इससे यह साफ हो गया है कि भारत ग्लोबल डिफेंस मार्केट में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।



