
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि पाकिस्तान के साथ सीजफायर से जुड़े किसी भी मुद्दे में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं है। चीन की ओर से इस विषय पर दिए गए दावे को भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे, चाहे वे सीमा विवाद हों या सीजफायर से संबंधित समझौते, पूरी तरह द्विपक्षीय हैं और इन्हें केवल भारत और पाकिस्तान के बीच ही सुलझाया जा सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि शिमला समझौता और लाहौर घोषणा इस बात की पुष्टि करते हैं कि दोनों देशों के बीच किसी भी तरह का समाधान आपसी बातचीत से ही निकलेगा, न कि किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से।
भारत ने यह भी दोहराया कि 2021 में नियंत्रण रेखा (LoC) पर सीजफायर की बहाली दोनों देशों के सैन्य स्तर पर आपसी सहमति से हुई थी। इसमें न तो किसी बाहरी देश की मध्यस्थता थी और न ही इसकी जरूरत है। चीन द्वारा यह संकेत देना कि उसने या किसी अन्य देश ने इस प्रक्रिया में भूमिका निभाई, तथ्यों से परे और भ्रामक है। भारत का मानना है कि ऐसे बयान क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकते हैं और अनावश्यक भ्रम पैदा करते हैं।
सरकार ने यह भी कहा कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थक है, लेकिन यह शांति तभी संभव है जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद करे। सीजफायर का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि पाकिस्तान अपनी जमीन से होने वाली आतंकी गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई करता है, तभी विश्वास बहाली की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
चीन को लेकर भारत का रुख साफ है कि वह अपने आंतरिक और द्विपक्षीय मामलों में किसी भी तरह की टिप्पणी या दखल को स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह संदेश दिया है कि दक्षिण एशिया के मुद्दों को समझने के लिए जमीनी सच्चाई और द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान जरूरी है। कुल मिलाकर, भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी विदेश नीति में संप्रभुता, आपसी सम्मान और बिना बाहरी हस्तक्षेप के संवाद सर्वोपरि हैं।



