
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच हुई हालिया मुलाकात ने भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने न केवल आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर चर्चा की, बल्कि सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े अहम मुद्दों पर भी खुलकर विचार-विमर्श किया। खास बात यह रही कि बातचीत के दौरान खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन में बढ़ती ऐसी गतिविधियों पर चिंता जताई और कहा कि भारत की संप्रभुता और एकता के खिलाफ किसी भी प्रकार के अभियान को किसी भी देश में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
स्टार्मर ने भी इस विषय पर गंभीरता दिखाते हुए कहा कि ब्रिटेन अपनी भूमि का उपयोग किसी भी प्रकार की चरमपंथी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और दोनों देशों की एजेंसियां इस दिशा में मिलकर काम करेंगी।
इसके अलावा दोनों देशों ने रक्षा, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी सहमति जताई। मोदी और स्टार्मर ने व्यापार साझेदारी बढ़ाने और निवेश के नए अवसर खोलने पर भी जोर दिया। यह भी तय हुआ कि भारत और ब्रिटेन एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि भारत और ब्रिटेन के ऐतिहासिक रिश्तों को एक आधुनिक साझेदारी में बदलने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समय भारत-ब्रिटेन संबंधों को “21वीं सदी की साझेदारी” बनाने का है।
कुल मिलाकर, यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली साबित हुई है। जहां एक ओर खालिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर ब्रिटेन का रुख भारत के लिए संतोषजनक रहा, वहीं आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया दौर शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है।



