UPPCL की स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल, नेगेटिव बैलेंस में 76,785 प्रीपेड कनेक्शन कटे

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट विद्युत मीटर व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) की प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना का उद्देश्य बिजली बिलिंग को पारदर्शी और डिजिटल बनाना था, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नेगेटिव बैलेंस होने के कारण 76,785 प्रीपेड स्मार्ट मीटर डिस्कनेक्ट कर दिए गए हैं। इससे हजारों उपभोक्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ा है।
प्रीपेड स्मार्ट मीटर प्रणाली में उपभोक्ता को पहले रिचार्ज कराना होता है, और बैलेंस खत्म होने पर बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती है। यह व्यवस्था बिल बकाया की समस्या को कम करने के लिए लागू की गई थी, लेकिन कई उपभोक्ताओं का कहना है कि तकनीकी गड़बड़ियों, गलत रीडिंग और समय पर बैलेंस अपडेट न होने से अनावश्यक कटौती हो रही है। कुछ मामलों में उपभोक्ताओं ने यह भी शिकायत की है कि बैलेंस होने के बावजूद कनेक्शन अस्थायी रूप से बंद हो गया।
बिजली विभाग का दावा है कि स्मार्ट मीटरिंग से राजस्व संग्रह में सुधार हुआ है और लाइन लॉस में कमी आई है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि जिन मीटरों का बैलेंस शून्य से नीचे गया, उन्हें नियमों के तहत अस्थायी रूप से डिस्कनेक्ट किया गया है और रिचार्ज के बाद आपूर्ति तुरंत बहाल कर दी जाती है। हालांकि, विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों का आरोप है कि ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए यह व्यवस्था अतिरिक्त दबाव पैदा कर रही है।
स्मार्ट मीटर योजना का मूल उद्देश्य डिजिटल इंडिया के तहत आधुनिक बिजली प्रबंधन को बढ़ावा देना है, लेकिन इसकी सफलता के लिए तकनीकी मजबूती, उपभोक्ता जागरूकता और शिकायत निवारण प्रणाली का प्रभावी होना जरूरी है। जब तक इन खामियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक यह व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर आती नजर नहीं आती।



