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फरवरी में विदेशी निवेशकों की जोरदार वापसी, 17 महीनों का रिकॉर्ड टूटा; क्यों बदला FPI का रुख?

फरवरी महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी करते हुए 17 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। लंबे समय तक मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते सतर्क रुख अपनाने वाले विदेशी निवेशकों ने अचानक बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है। इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना और प्रमुख सूचकांकों में मजबूती देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल अल्पकालिक ट्रेडिंग नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक मजबूती पर बढ़ते भरोसे का संकेत है।

एफपीआई के रुख में बदलाव की सबसे बड़ी वजह भारत की स्थिर आर्थिक वृद्धि दर और मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़े बताए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर जहां कई अर्थव्यवस्थाएं सुस्ती से जूझ रही हैं, वहीं भारत अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। महंगाई दर में नियंत्रण, विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता सरकारी खर्च विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा कॉरपोरेट कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता कम होने और डॉलर इंडेक्स में नरमी आने से उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ा है। भारत जैसे बड़े और स्थिर बाजार में निवेश अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है। टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, ऑटो और कैपिटल गुड्स सेक्टर में विदेशी निवेश खासतौर पर बढ़ा है। विश्लेषकों के मुताबिक यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं, तो आने वाले महीनों में भी एफपीआई निवेश का सिलसिला जारी रह सकता है।

हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और फेडरल रिजर्व की नीतियों में बदलाव जैसे कारक बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल फरवरी का आंकड़ा यह संकेत दे रहा है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर फिर से मजबूत हुआ है, जो आने वाले समय में बाजार को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

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