
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाज़ा पट्टी में तैनात की जाने वाली बहुराष्ट्रीय सेना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “गाज़ा में किस देश की सेना तैनात होगी, यह निर्णय इसराइल का होगा, न कि किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन या दूसरे देश का।” नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देश गाज़ा में शांति स्थापना के लिए एक अंतरराष्ट्रीय बल की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं। इसराइली प्रधानमंत्री ने कहा कि गाज़ा की सुरक्षा और भविष्य को लेकर किसी भी तरह का फैसला इसराइल की संप्रभुता से जुड़ा हुआ मामला है, और इसमें बाहरी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नेतन्याहू ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि गाज़ा को आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त कराना इसराइल की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमास जैसे आतंकी संगठन को जड़ से खत्म किए बिना शांति स्थापित नहीं की जा सकती। वहीं दूसरी ओर, फिलिस्तीनी समूहों और कुछ अरब देशों ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा है कि इसराइल गाज़ा पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जो वहां के लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है।
अमेरिका और यूरोपीय संघ इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाने की कोशिश में हैं। वे चाहते हैं कि गाज़ा में एक अंतरराष्ट्रीय शांति सेना तैनात हो जो मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण कार्यों को संभाल सके। लेकिन इसराइल की यह शर्त कि देशों का चयन वह स्वयं करेगा, कई कूटनीतिक जटिलताओं को जन्म दे सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का यह बयान न केवल इसराइल की सुरक्षा नीति को मजबूत करने का प्रयास है, बल्कि आने वाले राजनीतिक दबावों के बीच अपनी स्थिति को भी सशक्त बनाए रखने की रणनीति है। गाज़ा संकट पर यह नया मोड़ मध्य पूर्व की राजनीति को एक बार फिर अस्थिर कर सकता है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय बहस और भी तेज़ होने की संभावना है।



