
खालिस्तानी अलगाववाद से जुड़े एक आतंकी की हत्या की कथित साजिश को लेकर भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता का नाम अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया है। यह मामला तब सामने आया जब संयुक्त राज्य अमेरिका के अभियोजकों ने दावा किया कि अमेरिकी जमीन पर एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या की योजना बनाई जा रही थी और इस सिलसिले में गुप्ता की भूमिका की जांच की जा रही है। आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद से यह प्रकरण भारत-अमेरिका संबंधों, कूटनीति और सुरक्षा सहयोग के लिहाज से बेहद संवेदनशील बन गया है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, गुप्ता पर एक कथित ‘हिट प्लॉट’ में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का कहना है कि कथित तौर पर भाड़े के शूटर की व्यवस्था करने और संपर्क स्थापित करने जैसी बातें सामने आईं। हालांकि, बचाव पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है और इसे एकतरफा कहानी बताता है। गुप्ता के परिवार और वकीलों का कहना है कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है और अभी अदालत में सच्चाई सामने आनी बाकी है।
इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस तरह के आरोपों को गंभीरता से लेता है और यदि किसी स्तर पर चिंता जताई जाती है तो उसकी जांच की जाती है। भारतीय विदेश मंत्रालय पहले भी कह चुका है कि किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि सरकार की नीति नहीं है। वहीं, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए यह प्रकरण कूटनीतिक संवाद का हिस्सा बना हुआ है।



